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हम आदिवासी क्यों हैं?

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हम आदिवासी क्यों हैं? आदिवासी और अनुसूचित जनजाति होना दो अलग- अलग बात हैं। 'आदिवासी' प्रकृति द्वारा सृजन किया गया एक स्थायी अवस्था है जबकि 'अनुसूचित जनजाति' शासनतंत्र के द्वारा बनाया गया एक अस्थायी अवस्था है। आदिवासी परिवार में जन्म लेने वाला व्यक्ति अपने मृत्यु तक आदिवासी ही रहेगा | लेकिन उसके अनुसूचित जनजाति बने रहना सरकार के द्वारा निर्धारित शर्तों पर निर्भर करता है। एक आदिवासी समुदाय एक राज्य में अनुसूचित जनजाति की सूची में है जबकि वही समुदाय दूसरे राज्य में उक्त सूचि से बाहर है। आदिवासी की अवस्था पूरे विश्व में एक ही रहता है। संविधान के अनुच्छेद 342 के द्वारा अनुसूचित जनजाति निर्धारित करने की व्यवस्था है। अनुच्छेद 3421 के तहत भारत के राष्ट्रपति राज्य के राज्यपाल से प्रमार्श लेकर किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे सकते हैं। इसके अलावा अनुच्छेद 3422 के तहत संसद कानून बनाकर किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल या सूची से बाहर कर सकता है। अनुसूचित जनजाति की सूची राज्यवर अ...

About Adivasi (Hindi)

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             आदिवासी       आदिवासी का शाब्दिक अर्थ है- आदिम बम की जातिया। यह भी प्रमाण-मिलता है कि औपनिवेशिक दुग के पूर्व आदिवासियों की अपनी स्वतंत्र मन्ना थी। जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के संसाधनों पर उनका अधिकार था परन्तु जैसे- जैसे साम्राज्यवादी ताकतें बढ़ती गई, औपनिवेशिक सत्ताएं मजबूत होती गई. वैसे-वैसे आदिवासियों पर अत्याचार, शोषण बढ़ता गया। उनके संसाधनों पर जबरन कब्जा कर उन्हें अपनी जमीन से बेदखल किया जाने लगा। यह भी कि अपनी स्वायत्ता और अस्मिता के लिए जितना और जिस व्यापक पैमाने पर आदिवासियों ने पिडोह किया, उतना देश के किसी अन्य जवके ने नहीं किया। पूर्वोत्तर में सात राज्यों का गठन और कुछ ही यों पूर्व झारखण्ड, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड (सभी आदिवासी बहुल) का गठन आदिवासी अस्मिता की लड़ाई का सबूत है। यह हकीकत है कि इस धरा का मूल निवासी तथाकथित सभ्य समाज की बर्बरता से जंगलों, कंदराओं की ओट में रहने के लिए विवश रहा। प्रकृति से साहचर्य स्थापित कर जल, जंगल और जमीन के किसी कोने में दुवाका या विकास और सुविधा-संसाधन स...

The right of Adivasi

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          The right of Adivasi (Indigenous)                          According to the UNDRIP, the right of Adivasi (indegenous) are as follows....... Article 1 Indigenous peoples have the right to the full enjoyment, as a collective or as individuals, of all human rights and fundamental freedoms as recognized in the Charter of the United Nations, the Universal Declaration of Human Rights and international human rights law. Article 2 Indigenous peoples and individuals are free and equal to all other peoples and individuals and have the right to be free from any kind of discrimination, in the exercise of their rights, in particular that based on their indigenous origin or identity. Article 3 Indigenous peoples have the right of self-determination. By virtue of that right they freely determine their political status and freely pursue their economic, social and cultural development....

About Adivasi/Banwasi

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                  आदिवासी कौन है ? आदिवासी शब्द दो शब्दों 'आदि' और 'वासी' से मिल कर बना है और इसका अर्थ मूल निवासी होता है। भारत की जनसंख्या का 8.6% (10 करोड़) जितना एक बड़ा हिस्सा आदिवासियों का है। पुरातन लेखों में आदिवासियों को अत्विका और वनवासी भी कहा गया है (संस्कृत ग्रंथों में)। महात्मा गांधी ने आदिवासियों को गिरिजन (पहाड़ पर रहने वाले लोग) कह कर पुकारा है। भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए 'अनुसूचित जनजाति' पद का उपयोग किया गया है। भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में किरात गोंड,मुंडा, खड़िया, हो, बोडो, भील, डामोर खासी, सहरिया, संथाल, मीणा, उरांव,लोहरा, परधान, बिरहोर, पारधी, आंध, टाकणकार आदि हैं। भारत में आदिवासियों को प्रायः 'जनजातीय लोग' के रूप में जाना जाता है। आदिवासी मुख्य रूप से भारतीय राज्यों उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में मुख्यतः बाँसवाड़ा डूंगरपुर , गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक है जबकि भारतीय पूर्वोत्तर राज्यों में यह बहुसंख्यक हैं, जैसे मिजोरम। भारत स...

आदिवासी हिन्दू नहीं है

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जनगणना 2021 : ‘आदिवासी कॉलम नहीं ,तो जनगणना नहीं’ का नारा बुलंद करने दिल्ली में जुटेंगे आदिवासी!' सरना टुडे,दिल्ली: आगामी 18 फरवरी को आदिवासी समुदाय के लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे। उनकी मांग है कि जनगणना प्रपत्र में उनके लिए पृथक धर्म कॉलम हो। इसकी वजह यह कि वे स्वयं को हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी नहीं मानते। अगले वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना के आलोक में देश के सभी राज्यों के आदिवासी अपने लिए धर्म कोड के रूप में आदिवासी की मांग को लेकर आगामी 18 फरवरी, 2020 को दिल्ली के जंतर-मंतर एवं सभी राज्यों के राजभवन के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे।  बताते चलें कि अंग्रेजी शासन काल में आदिवासियों के लिए आदिवासी धर्म कोड था, जिसे आजादी के बाद 1951 में खत्म कर दिया गया। इसके साथ ही आदिवासियों पर हिंदू धर्म थोपने की प्रक्रिया शुरू हो गई। आदिवासी इसी का विरोध कर रह हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नीतिशा खलको के मुताबिक जनगणना प्रपत्र में आठ कॉलम हैं जिनका उपयोग धर्म की पहचान के लिए किया जाता रहा है। इनमें सात कॉलम हिंदू, सिक्ख, मुस्लिम, जैन, बौद्ध, ...

आदिवासी बचाओ ~जंगल बचाओ

आदिवासी बचाओ ~जंगल बचाओ By Satish Pendam जंगल बचाओ ~  आदिवासी बचाओ