How to teach about humanity and our culture to our next generation...!

हमारी अगली पीढ़ी को मानवता और हमारी संस्कृति के बारे में कैसे पढ़ाया जाए ...!

    
जय जोहार साथियों !
आपने इतना तो सुना ही होगा की लोगों को देख देख
कर जल्दी सीखने की आदत होती है |आज समाज के
सामने एक चुनौती हैं की कैसे हम आने वाली पीढ़ी
को इस दुनिया के दिखावटी आदर्शवाद से दूर रख कर
उन्हें वास्तविक इन्सानियत की परिभाषा सिखाये।
हमें सीखना पड़ेगा की कैसे प्रकृति को बिना नुकसान
पहुंचायें हम अपनी जरूरतें पूरी कर सके ताकि प्रकृति
भी हमें अपनी गोद में सुकून से रहने दें पर ये सब
किताबों की पढ़ाई से संभव नहीं होगा | हमे घरेलू स्तर
पर भी अपने छोटे छोटे बच्चों को हमारी संस्कृति,
बोली, भाषा से खुद रूबरू कराना पड़ेगा। खास कर
st/sc/obc समुदाय को अपने बच्चो के दिमाग में
हिन्दू मुस्लमान का कीड़ा तो घुसने ही नहीं देना है और
बच्चो के दिमाग में बचपन से ही छोटा भीम कार्टून की
कहानियों की जगह बाबा साहब की कहानियों को
दिखाना शुरू करना पड़ेगा। इतना तो जरूर सीखाना
ही पड़ेगा की बच्चा गांधी और गोडसे में से अच्छे बुरे
की पहचान सके सके |और सबसे बड़ी बात की हम
प्रकृति पूजक है ये बात बोल बोल कर नहीं सिखाना है
बल्कि हमारे रोज मर्रा के काम ऐसे होने चाहिए की
हमारे समुदाय के नन्ने मुन्ने बच्चे खुद देख कर सीखे।
आज के नन्ने मुन्ने प्रकृति को समझेंगे तो देखना एक
दिन ऐसा आएगा जब समाज को जगाने के लिए ना
तो जनजागरण करना पड़ेगा और ना ही जलवायु
परिवर्तन को रोकने के लिए कोई वैश्विक स्तर पर
मीटिंग करनी पड़ेगी।
जोहार
                 Frm:Abp


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