How to relief from hinduism..
हिंदुत्ववाद से कैसे राहत मिलेगी...

सरना समाज झारखंडी आदिवासी के लोग हिंदू
संस्कृति के गुलामी में जी रहे हैं शिव ,काली, मनसा,
की पूजा सरना संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है हिंदू
संस्कृति का यही गुलामी के कारण सरना कोड लागू
करना बहुत मुश्किल है।
प्राचीन काल में ही ब्राह्मणों ने अपना संस्कृति को
आदिवासी समाज में फैला दिया है ओझा प्रथा या
जादू टोना प्रथा का गहरा असर पड़ रहा है क्योंकि
यह शिव काली, मनसा, पर आधारित हिंदू संस्कृति है
अभी भी 60% सरना वासी शिव, काली मनसा के
कट्टर भक्त है सरना कोड लागू होने पर हिंदृ देवी
देवताओं की पूजा को सरना संस्कृति से बाहर कर
दिया जाएगा।
। ऐसे में इन हिंदू देवी देवताओं के भक्तों का गुस्सा
होना निश्चित है |
हमारे नेता लोग यह चीज अच्छी तरह से जानते हैं
इसलिए सरना कोड लागू करना ही नहीं चाहेगा
क्योंकि अधिकतर आदिवासी नेता के बेटा बेटी लोग
दिकू से शादी किए हैं और हमारे आदिवासी समाज के
अगुआ गन हिंदृ देवी देवताओं का दर्शन करते हैं जिस
दिन हिंदू देवी देवताओं की पूजा अर्चना छोड़ देंगे
सरना कोड लागू करने के हजारों नेता आगे आएंगे
अन्यथा कोई भी नेता लोगों के आस्थाओं और
भावनाओं को समझते हुए सरना कोड लागू करने का
हिम्मत भी नहीं करेगा।
हमारे युवा आदिवासी सरना समाजसेवी भ्रमण के
उपरांत अलग-अलग क्षेत्र में आदिवासी घरों में
बजरंगबली के झंडे देखे गए हैं झारखंड के 90% चीक
बड़ाईक जो कि ट्राइबल में आते हैं वह लोग अपना
कॉलम क्षेत्रों में हिंदू रीति रिवाज को
मानते हैं और हिंदृ रिती रिवाज में शादी विवाह किया
जाता है |
अगर हम सरना कोड लागू करना चाहते हैं तो हिंदू
देवी देवताओं की पूजा को छोड़ देना होगा।
इसके लिए ब्राह्मणों द्वारा फैलाए गए डायन भूत के
भरम से छुटकारा पाना होगा।
अगर हम सरना कोड चाहते हैं तो समाज में से हिंदू
संस्कृति को हटाना ही होगा आदिवासी एक प्राकृतिक
पूजक है और प्राकृतिक पूजक ही रहेगा।
मैं कहना चाहूंगा हमारे आदिवासी के युवा पीढ़ी से
अनुरोध है कि वो आदिवासी समाज में शादी विवाह
करें।
By:K.D.Lakra